हम भारत के लोग...
*हम भारत के लोग...* ~~~~~~~~~~~~ >> भारतीय संविधान कहता है कि, 'हम भारत के लोग' द्वारा यह संविधान 'हम भारत के लोग' के प्रति 'अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित' किया जाता/गया है। इसका नैतिक, वैधानिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय दृष्टी से भी एक अर्थ यह होता है/होना चाहिए कि, 'हम भारत के लोग' द्वारा संविधान में वर्णित सभी प्रावधानों को उसके सही स्पिरीट/परिप्रेक्ष्य में स्वयंपोषित रूप से अपनाकर उनका अनुपालन करना भी 'हम भारत के लोग' के लिए अनिवार्य है। परन्तु क्या आज 'हम भारत के लोग' इस विधान को अपनी कृतियों से सही साबित कर पा रहें है? यह प्रश्न अपनी भयावह उपस्थिति दर्ज कराता 'हम भारत के लोग' को डरा, धमका तो नही रहा है? 'हम भारत के लोग' को अपने अंदर झांककर इन प्रश्नों का जवाब तलाशना अब अनिवार्य हो गया है। >> संविधान द्वारा प्रदत्त प्रावधानों के अनुरूप वैज्ञानिक चेतना से संपन्न तर्कसंगत समाज बनने/बनाने की 'हम भारत के लोग' की यात्रा फिलहाल रुकी हुई सी लग रही है, जबकि प्रतिगामी सोच, अविवेकवाद, अलगाववाद, पोंगाप...