पोवारी बोली : ऐतिहासिक 200 वी सलग कविता स्पर्धा.
*पोवारी/पंवारी/पवारी बोली : ऐतिहासिक 200 वी सलग कविता स्पर्धा* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ >> कोनतीच बोली/भाषा अनंत काल वरी टिकन/टिकावन की रहे तं वोनं बोली/भाषा को लिखित रूपच वोला अमरत्व प्रदान कर सकं से. बोली/भाषा को अमरत्व को येव् नियम आमरो पोवारी/पंवारी/पवारी बोली/भाषा ला भी लागू होसे. >> आमरो बोली की ऐतिहासिकता जाचनो पर प्रथमदर्शनीच असो दिसं से का येनं बोली को अस्तित्व हजारो साल पासना से. असो रहेव् को बाद भी या बोली मुख्यतः मौखिक रुपमाच रहेव् लका येनं बोली को इतिहास खोजनो कठीण जान पड़ से. मुनस्यारीच येन् बोली ला लिखित रूप मा आनन् को अना येनं बोली को अस्तित्व सतत कायम ठेवन् को प्रयास मोठो/विशाल रूप मा करनो अनिवार्य जानस्यारी पोवारी/पवारी (बोली) साहित्य कला संस्कृति मंडल की स्थापना अक्तूबर 2018 मा करनो मा आयी. अना पह्यलोच अखिल भारतीय पोवारी बोली साहित्य संमेलन घुमाधावडा, तिरोडा, जि.गोंदिया मा दि.03.02.2019 ला साजरो करनो मा आयेव् होतो. >> पोवारी/पवारी साहित्य कला संस्कृति मंडल की स्थापना करताच मंडल का राष्ट्रीय सचिव ॲड.देवेंद्र चौधरी इनन् एक व्हाॅट्सॲप समूह तय...