पोवारी बोली अना मी : एक पुनरावलोकन
*पोवारी बोली अना मी : एक पुनरावलोकन* -------------------------------------------------------- >> मी फरवरी 2013 मा रिटायर भयेव् अना कोनतोच शहर मा स्थायी नही होयस्यार आपलो जन्मगाव/खेडेगाव बोरकन्हार मा पुनर्स्थायी होन् साठी मार्च 2013 पासना आमरो गावमा रव्हन् ला आयेव् सपरिवार। >> च्यालीस-पैंतालीस साल शिक्षण अना नवकरी को कारन लका बाहेर-बाहेर रव्हेव् होतो मुनस्यारी बचपनकी पोवारी बोली ठीक लका बोलता आवत् नोहोती। अटक-अटकस्यारी बोलत होतो. >> पर आमरो घर् गावमा एक नवकर होतो, वोको नाव देवाजी रहांगडाले। येन् देवाजीला पोवारी को सिवाय दुसरी कोनतीच भास्या बोलता आवतच् नोहोती। वोकोसंग् पोवारी मा बोलता बोलता मी धीरू धीरू पहलेवानीच धाराप्रवाह पोवारी बोलन् लगेव्। >> मी झाडीबोली को चळवळ मा 1979-80 पासना कार्यरत सेव्. झाडीबोली साहित्य मंडळ को संस्थापक/आजीव सभासद भी सेव्. तसोच महाराष्ट्र मा बोली जानेवाली सप्पाई बोलीईनको एक अखिल महाराष्ट्र बोली साहित्य महामंडळ को भी मी संस्थापक/आजीव सभासद सेव्. >> येको कारणलका मी पोवारी बोली की एक लहानशी पोस्ट 2013 -14 को दरम्यान फ...