Posts

Showing posts from August, 2019

एक पत्र

बोरकन्हार-441902/जि.गोंदिया/महाराष्ट्र  दि. 12.07.2019   ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ प्रबंधक, राजकमल प्रकाशन प्रा. लि. 1-बी, नेताजी सुभाष मार्ग, दरियागंज नई दिल्ली-110 002. सादर नमस्ते.     मेरी मातृभाषा भलेही हिंदी की उपभाषा पोवारी है, लेकिन महाराष्ट्र का रहिवासी होने के नाते कभी-कभी मेरी हिंदी मराठीकरण का शिकार हो जाती है। अतः सर्वप्रथम क्षमस्व।       अरुंधति राॅय द्वारा लिखित, अनिल यादव तथा रतन लाल द्वारा अनुवादित और आपके द्वारा प्रकाशित "एक था डाॅक्टर एक था संत" अभी अभी पढ़कर समाप्त की है। यह पुस्तक पढ़ने के पश्चात मेरी अल्पबुद्धि की प्रतिक्रिया से आपको अवगत कराना चाहता हूँ। 1)संशोधन की विश्वमान्य प्रक्रिया मे सर्वप्रथम उपलब्ध, अनुपलब्ध सामग्री जमा की जाती है। उसके बाद उन सामग्री मे सम्मिलित (या यूँ कहे, उनसे प्राप्त) कथ्य और तथ्यों की/का तटस्थ, निरपेक्ष, भेदभावरहित, प्रामाणिकता और नैतिकता के प्रकाश मे छानबीन, समीक्षा, परिशीलन करने के बाद किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जाता है। तभी वह निष्कर्ष वैज्ञानिक पद्धति से परिष्कृत निष्कर्ष कहलाने को ...