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सभ्यता का विकास और विनाश : एक प्रश्न! (प्रकाशित)

♡ सभ्यता का धारणाक्षम एवं शाश्वत विकास, विज्ञान और संस्कृति♡     (साहित्य की अनिवार्यता.)//प्रकाशित : दिवान मेरा// अप्रैल-मई 2022) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~       इस पृथ्वीपर आजतक कई सभ्याताओं का उदय और विनाश हुआ है| यह विनाश कैसे हुआ, इस संदर्भ में मानववंशशास्त्र (Anthropology) का एक सिद्धांत बताता है कि, जिन सभ्यताओं ने संस्कृती और निसर्ग का सम्मान करने के बजाए इन पर विज्ञान के द्वारा विजय पाने का प्रयास किया वह सभ्यताएँ विनाश को प्राप्त हुई| इनमे मेसोपोटेमिया, बाबिलोनिया, रोम, ग्रीक, इ. सभी पाश्चात्य सभ्यताएँ सामील है| लेकिन भारतीय सभ्यता, गोंडी(आदिवासी) सभ्यताएँ अभीतक(???) टिकी हुई है/(थी!)| परंतु जबसे हम भारतीयों ने पाश्चात्य सभ्यताका अनुकरण एवं अनुसरण करना प्रारंभ किया है, तबसे भारतीय सभ्यता भी आज विनाश के कगार पर खड़ी हो गई है| कुल मिलाकर हम कह सकते है कि, निसर्ग का सम्मान करनेवाली संस्कृती यह निसर्ग पर विजय पाने की कामना रखने वाली पर्यावरण-नाशक-विज्ञान-विचार-पद्धती से श्रेष्ठ एवं धारणाक्षम तथा शाश्वत होती है|       संक्षेप में कहे ...