इतिहास : तटस्थता का आदर्श और कुटिलता की वास्तविकता
*इतिहास : तटस्थता का आदर्श और कुटिलता की वास्तविकता* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मनुष्य ने अपने अतीत को सुरक्षित रखने के लिए “इतिहास” की संकल्पना विकसित की। इतिहास केवल घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं है; वह स्मृतियों की राजनीति है, सत्ता का प्रतिबिंब है और कई बार सत्ता का साधन भी बन जाता है। इसलिए “इतिहासकार तटस्थ और निष्पक्ष होना चाहिए” यह आदर्श भले स्वीकार किया गया हो, लेकिन व्यवहार में यह आदर्श अक्सर टूटता हुआ दिखाई देता है। इसके विपरीत, कुटिल उद्देश्यों, पूर्वाग्रहों, सत्ताधारी विचारधाराओं और सांस्कृतिक वर्चस्व के आधार पर इतिहास को “गढ़ा” या “बिगाड़ा” गया है—यह वास्तविकता अधिक स्पष्ट रूप से सामने आती है। *१. तटस्थता का आदर्श : एक सैद्धांतिक ढांचा* इतिहास-लेखन में तटस्थता (objectivity) की अवधारणा विशेष रूप से 19वीं शताब्दी में पश्चिमी चिंतन परंपरा में प्रमुख हुई। यह अपेक्षा की गई कि इतिहासकार “जैसा वास्तव में हुआ” वैसा ही प्रस्तुत करे। लेकिन यहीं एक मूल प्रश्न उठता है—क्या घटनाओं को पूरी तरह समझकर वैसा ही...