Posts

Showing posts from June, 2021

पोवार समाज और पोवारी बोली की ऐतिहासिकता : वस्तुस्थिती का संक्षिप्त आकलन (हिंदी)

*पोवार समाज और पोवारी बोली की ऐतिहासिकता :  वस्तुस्थिती का संक्षिप्त आकलन* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ >> पोवार समाज और उनकी पोवारी बोली यह दोनों प्राचीनतम ऐतिहासिकता की वस्तुस्थिति है। इतिहास का विषय मृत अतीत होता है, जीवित वर्तमान नहीं। इसका संबंध उन घटनाओं से होता है जो घट चुकी हैं, चालू घटनाओं से नहीं जो तरलावस्था और निर्माण की प्रक्रिया में हैं। इतिहास का वास्ता उससे होता है जो हो चुका है, न कि उससे जो यदि होता तो.....। इतिहास का विषय आदर्श नहीं, यथार्थ तथ्य होता है। इस तथ्य के मद्देनजर देखा जाए तो, पोवार समाज के उद्गम का पूर्णरूपेण/सही-सही इतिहास अभी भी इतिहास के गर्भ में ही स्थित है। हमारे कुछ पूर्वजों ने इस इतिहास को खोजने/खंगालने का बहुत अच्छा प्रयास भी किया है। वर्तमान में भी हमारे कुछ अधिकृत इतिहासतज्ज्ञ इस इतिहास की खोज में दिलोजान से प्रयासरत हैं। किसी भी समाज का इतिहास यह मात्र कोई एक ठहराव की अवस्था न होकर वह एक अनवरत प्रक्रिया के सदाचलित प्रयास का प्रतिफल होता है। किसी भी समाज के तथ्यपरक इतिहास की खोज करने हेतु तत्कालीन -- हस्तलिखित/प्रकाशित/अप्रकाशित पांडुल...