निजता का विरेचन
*निजता का विरेचन*
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>> निजता जब सार्वजनिक रूप से प्रभावित होने लगती है तब उसका विरेचन अनिवार्य रूप से आवश्यक जान पड़ता है। इसी के मद्देनजर मै आज अपनी निजता का विरेचन सार्वजनिकता में करना चाहता हूँ।
>> यह बात कोई नयी या अनहोनी नहीं है कि हर जीवन का अंत निश्चित है। फिरभी यह अंत कई बार हमें हिला देता है, अस्वस्थ कर देता है। कल ही की बात लिजिए। हम कुल आठ साडू (सागील) है(थे)। जिनमे से हमारे द्वितीय क्रमांक के साडू 4 अगस्त के रात्रि में निसर्गशरण हो गए। मै पत्नी के साथ उनके अंतिम दर्शन कर उनके अंतिम संस्कार के वक्त पूर्ण समय उपस्थित था। बड़ी अजीब सी अस्वस्थता का अनुभव कर मै बारबार भावुक हो जाता था। जबकि मेरे भयंकर अपघातों की श्रृंखला तथा मेरी कैंसर मैत्री के दरमियान भी मै कभी अस्वस्थ, विचलित या भावुक नहीं हुआ था। फिर यह क्या था, क्या उम्र का तकाज़ा, या यादों की बारात, या कुछ और जो मुझे अस्वस्थ और भावुक कर गया। अंतिम क्षण तो सभी को 'भोगना'ही है, यह एकमात्र परमसत्य है। फिर भी हम ऐसे कुछ क्षणों में विचलित, अस्वस्थ, भावुक क्यो हो जाते है? इस प्रश्न का उत्तर भगवद्गीता कंठस्थ करने के बाद भी नहीं मिल पाता।
>> साडू के अंतिम संस्कार के बाद देर रात्रि में गाव लौट आने पर पुत्र ने बताया कि 4 अगस्त को ही दोपहर को मेरा बचपन का मित्र मोडकू पटले भी निसर्गशरण हो गया। मेरे पहली कक्षा से आठवी कक्षा तक मेरा सहपाठी रहा तथा उस दरमियान मेरा अघोषित बाॅडीगार्ड रहा मोडकू पटले मेरी यादों में रातभर भटकता रहा। स्कूल में उसके सामने/देखते मुझे कोई "हूं" भी नहीं कह सकता था। शरीर से धष्टपुष्ट मोडकू उस दुस्साहसी बालक की पिटाई कर देता था। आठवी के बाद उसने शिक्षा से छुट्टी लेकर खेती करना सुरू किया था। और अंततक खेती ही करता रहा। पिछले कुछ दो-तीन सालों से उसे दिखना बंद हो जाने से उसका घूमना-फिरना थम गया था। वह मुझसे लगभग दो साल उम्र में बड़ा था। 4 अगस्त 2022 को चला गया अपनी अंतिम यात्रा पर। आज 05 अगस्त को सुबह मैने उसका चेहरा अंतिम बार देखा और मेरी आँखों के सामने मेरा बचपन ताजा हो गया। कितनी अजीब बात है कि मेरे संगी की अंतिम यात्रा और मेरा-उसका बचपन कुछ देर साथ-साथ चलते रहे।
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@ॲड.लखनसिंह कटरे,
बोरकन्हार, जि.गोंदिया.
(05 अगस्त 2022)
~~~~~~~||ॐ शांति शांति शांति||~~~~~~~~~~
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