एक अंग्रेजी कहावत और तथ्य : एक आकलन
*एक अंग्रेजी कहावत और तथ्य : एक आकलन*
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>> First Impression is the last Impression, यह एक अंग्रेजी कहावत कई बार उद्घृत की जाती है। लेकिन मेरे अल्पबुद्धि-आकलन के अनुसार यह कहावत, मराठी संत तथा 'दासबोध' नामक सुप्रसिद्ध मराठी ग्रंथ के रचयिता रामदास स्वामी द्वारा उनके इसी ग्रंथ में वर्णित तथा व्याख्यायित किए गए मुर्खों का, मात्र दिवास्वप्न ही कहलाने योग्य है। क्योंकि मानवीय सभ्यता एवं संस्कृति के इतिहास में कहीं भी इस कहावत का सच्चा या कच्चा/पक्का भी उदाहरण नहीं मिलता। वर्तमान युग के LPG* के सायें में तो यह कतई संभव ही नहीं है, यह स्वयंस्पष्ट है।
>> यदि ऐसा होता तो, महमद घोरी कभी पृथ्वीराज को हरा नहीं पाता, छत्रपति शिवाजी महाराज कभी हिंदवी स्वराज्य की स्थापना नहीं कर पाते। हमारे स्वातंत्र्य सेनानी कभी भारतीय स्वतंत्रता हासिल नहीं कर पाते और राजीव गांधी की कभी हार नहीं होती। ऐसे कई उदाहरणों से मानव सभ्यता और संस्कृति का इतिहास भरा पड़ा है। इस अंग्रेजी कहावत का अर्थ किसी हिटलर द्वारा कुछ कालावधी के लिए अपना वर्चस्व बना और बचा पाने में अवश्य ढूंढा जा सकता है; किन्तु यह वर्चस्व बड़े ही बुरे तथा खतरनाक तरीके से ढलता है, यह इतिहाससिद्ध वस्तुस्थिती भी है।
>> यदि हम Impression की ही बात करें तो यह एक घटना नहीं अपितु एक प्रक्रिया मात्र है। क्षणैक घटना और लंबे समय तक सतत घटित प्रक्रिया इनमें स्वाभाविक रूप से ही बहुत फर्क होता है। क्षणैक घटना से यदि कोई अपना तथाकथित Impression कायम करना/बनाना चाहे तो भी वह हमेशा के लिए सफल नहीं हो सकता, क्योंकि नाटकीय प्रवृत्तियाँ कभी स्थायी नहीं हो सकती। नाटकीय प्रवृत्ति का अंत बहुत जल्द हो जाता है, यह प्रकृति का नियम ही है। और मानव आजतक कई कोशिशों के बावजूद प्रकृति पर विजय नहीं पा सका है, और ना कभी पा सकता है। अतः First Impression वाली बात भी कभी कायम नहीं रह सकती।
>> मानव को समाजशील प्राणी कहा गया है। (Man is a Social Animal.) परिणामस्वरूप मानव का समाजीकरण होना लाज़मी ही है। इस समाजशील मानव का दुसरे एक अजनबी मानव से जब संपर्क होता है, तब उसे अपना अलगसा असाधारण अस्तित्व दिखाने/जताने की लालसा होना स्वाभाविक ही है; लेकिन यह लालसा नकारात्मक होगी या सकारात्मक, इस से उसके तद्भव Impression का उद्भव होता है। यह उद्भूत Impression कायम होगा या क्षणैक यह उस मानव/व्यक्ति के सहज या नाटकीय प्रवृत्ति पर निर्भर होता है। सहज प्रवृत्ति से उद्भूत Impression कायम होने की तथा नाटकीय प्रवृत्ति से उद्भूत Impression क्षणैक होने की संभावना प्राकृतिक रूप से रूपायित/संचालित होती है। इस संभावना को प्रभावित या प्रताड़ित करने के सारे अच्छे/बुरे प्रयास अपना धरातल खोने लगते है। और Impression की बात मात्र दिवास्वप्न बन कर रह जाती है। इसीलिए मेरा अल्पबुद्धि-आकलन यह कहता है कि, First Impression is the last Impression यह अंग्रेजी कहावत, रामदास स्वामी द्वारा व्याख्यायित मुर्खों का, मात्र दिवास्वप्न ही है। (#340)
(*LPG = Liberalization, Privatization, Globalization)
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@ॲड.लखनपाल सिंह कटरे,
बोरकन्हार-441902, जि.गोंदिया (विदर्भ-महाराष्ट्र)
(14 अगस्त 2022)
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